बातें जो मैं अपनी बेटी को जरूर सिखाऊंगी

सबसे पहले तो मैं आप सबको ये बताना चाहती हूँ क़ि मेरी कोई बेटी नहीं है लेकिन मैं एक औरत हूँ, एक माँ हूँ… मैंने कई बार लोगों को अपने बच्चे से कहते सुना हैं “तू लड़का हैं, लड़कियों की तरह मत रो |

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क्या बचपन याद है तुम्हे ?

पेप्पेर्मेंट वाली सिगरेट का पैकेट लेकर ,

दोस्तों को शाम को खेलने का वादा देकर,

वो खुद से बड़े गली के लडको से लड़कर,

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फिर से मम्मी घर ?

चाहे कोई हाउसवाइफ हो या वर्किंग, चाहे निडर हो या सहमी, अपने घर जाने का सही कारण दे या फिर हज़ारो झूठे कारण बनाएं, मम्मी का घर पास हो या दूर, हर एक औरत की अपने मायके जाने के नाम से ही आँखे टिमटिमा उठती हैं |

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